स्कूल टीचर से शांत करवाई अपनी कामवासना

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मेरा नाम संजना है मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं, मैं बचपन से ही टीचर बनना चाहती थी, मेरा सपना था कि मैं टीचर बनू। जब भी हमारे स्कूल में कोई प्रोग्राम होता था तो मैं उसमें हमेशा ही टीचर  बनती थी इसलिए मुझे बहुत शौक था टीचर बनने का और मेरे घर में मेरी मम्मी भी टीचर है और वह काफी समय से एक ही स्कूल में पढ़ा रही है। मैं इंदौर की रहने वाली हूं। हमारे घर में पहले से ही पढ़ाई का बहुत अच्छा माहौल है इसीलिए मैं बचपन से ही पढ़ने में बहुत अच्छी थी और हमारे स्कूल में जितने भी प्रोग्राम होते थे मैं उनमें बहुत बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया करती थी।

मेरी मम्मी मुझे बचपन से ही सपोर्ट करती आ रही है और मेरे पापा भी एक सरकारी कर्मचारी है लेकिन उनका मुझ से ज्यादा कुछ संपर्क नहीं रहता क्योंकि वह बाहर ही रहते हैं, उनकी पोस्टिंग इस वक्त भोपाल में है इसीलिए वह घर भी बहुत कम आते हैं। बचपन से ही मैंने अपनी मां को अपना आदर्श माना है और मैं उन्हीं की तरह टीचर बनना चाहती हूं इसीलिए मैंने सोचा जब मेरा ग्रेजुएशन पूरा हो जाएगा उसके बाद मैं बीएड  कर लूंगी। जब मैंने अपनी इच्छा अपनी मां से रखी तो वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी कि तुमने यह बहुत ही अच्छा फैसला किया कि तुम एक टीचर बनना चाहती हो। मैंने उन्हें कहा कि आपको तो पता ही है मैं बचपन से ही आपको अपना आदर्श मानते हुए आ रही हूं इसलिए मैं भी आपकी तरह ही एक अध्यापिका बनना चाहती हूं। कॉलेज में जितने भी मेरे दोस्त हैं वह सब बहुत ही अच्छे हैं, उनके साथ में मुझे समय बिताना बहुत अच्छा लगता है और वह मुझे बहुत ही अच्छे से समझते हैं इसलिए मैं ज्यादा से ज्यादा उनके साथ समय बिताना पसंद करती हूं। जब हमारे कॉलेज के पेपर नजदीक थे तो उस वक्त मैंने बहुत लड़कों की मदद भी की थी क्योंकि वह कभी भी कॉलेज पढ़ने नहीं आए और उस वक्त उन्हें नोट्स की जरूरत थी इसलिए मैंने उन्हें कुछ नोट्स दिए।

मेरे और मेरे दोस्तों के बीच में बहुत अच्छी बातचीत है इसलिए मैं उनकी मदद हमेशा ही करती हूं। जब मेरे कॉलेज की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी और मैं कुछ समय के लिए घर पर ही थी उसके बाद मैंने बीएड  का फॉर्म भर दिया और मेरा एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन भी हो गया। जब मैं बीएड की पढ़ाई कर रही थी तो उस वक्त मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त बने थे और कुछ समय बाद मेरी बीएड की पढ़ाई भी हो गई, उसके बाद मैंने अपनी नौकरी के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया लेकिन मुझे किसी अच्छी स्कूल में पढ़ाने के लिए नहीं मिल पा रहा था इसलिए मैं फिलहाल घर पर ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही थी लेकिन जब मेरा सिलेक्शन हो गया तो मैं उस वक्त बहुत खुश हुई और मेरी मां भी बहुत खुश थी क्योंकि मैंने वाकई में बहुत मेहनत की थी इसलिए वह भी मुझसे बहुत खुश थी। मैंने जिस स्कूल में पढ़ाना शुरू किया उसमें बहुत सारे टीचर पढ़ाते थे और उनमें से ही एक टीचर अरविंद हैं, वह बहुत ही अच्छे हैं उनकी अभी शादी नहीं हुई है लेकिन वह किसी हीरो से कम नहीं है। मैं जब भी उन्हें देखती हूं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि उनके चेहरे पर हमेशा ही मुस्कुराहट रहती है और उन्हें देखकर कभी भी मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वह कभी दुखी भी होते हैं या फिर वह कभी गुस्सा भी होते हैं, उनका स्वभाव ही इतना शांत है कि यदि कोई उन्हें ऊंची आवाज में भी बोल दे तो वह उसके बदले कभी भी उल्टा जवाब नहीं देते। मैं उन्हें हमेशा ही देखा करती थी लेकिन उन्होंने मुझे कभी भी नहीं देखा और ना ही वह मेरी तरफ देखते थे। मुझे कभी भी उनके साथ समय बिताने का मौका नहीं मिला और ना ही वह मेरे साथ बैठते थे। मैं जब भी उनके पास बैठने की कोशिश करती तो वह उठ कर चले जाते क्योंकि उनका नेचर बहुत ही शर्मिला किस्म का है। वह बहुत ही शर्माते हैं इसी वजह से वह ज्यादा किसी से भी बात नहीं करते लेकिन मैंने भी ठान लिया था कि मैं अरविंद जी से बात कर के ही रहूंगी लेकिन मुझे कभी भी कोई ऐसा मौका नहीं मिल रहा था जिससे कि मेरी उनसे बात हो पाये लेकिन मुझे एक दिन ऐसा मौका मिल ही गया जब मैं उनसे बात कर सकती थी।

हमारे स्कूल में बच्चों का एक छोटा सा प्रोग्राम था उसी को लेकर हमें स्कूल में तैयारियां करवानी थी और मैंने अरविंद सर से बात की, कि आप भी बच्चों को तैयारी करवा रहे हैं, तो वह कहने लगे कि हां मैं भी बच्चों को तैयारी करवा रहा हूं। उसी उसी दौरान मेरी अरविंद सर से बहुत बात होती थी और वह भी मुझसे बहुत बातें करते थे। हम लोगों का वह प्रोग्राम बहुत ही अच्छा हुआ और उसके बाद हम दोनों के बीच में भी बातें होने लगी थी क्योंकि मैंने उनकी बहुत मदद की इसलिए वह मुझसे बातें करते थे। मैं तो चाहती थी कि अरविंद सर मुझसे बात करें। मैंने एक दिन सोचा कि क्यों ना मैं अरविंद सर को अपने घर पर ले चलू। मैंने कहा कि यदि आपके पास समय हो तो आप मेरे घर पर चल सकते हैं, वह पहले मुझे कहने लगे कि मुझे कहीं और काम है इसलिए मैं आपके घर पर नहीं आ सकता लेकिन जब मैंने उन्हें जिद की तो वह कहने लगे कि मैं छुट्टी के दिन आपके घर पर आ जाऊंगा। उस दिन हम दोनों बैठकर काफी बात कर सकते हैं, तब मुझे भी अच्छा लगेगा, जब उन्होंने मुझसे यह बात कहीं तो मैं बहुत खुश हो गई लेकिन वह दिन अभी तक नहीं आया था जब वह हमारे घर पर आ सके। एक दिन उन्होंने मुझे खुद ही कहा कि मैंने आपको काफी समय पहले आपके घर में आने की बात कही थी लेकिन मैं आपके घर नहीं आ पाया, मैं सोच रहा हूं कल हमारी छुट्टी है तो क्यों ना मैं आपके घर आ जाऊं, जब उन्होंने मुझसे यह बात कही तो मैं बहुत खुश हो गई। मैंने उन्हें कहा कि यदि आप हमारे घर पर आएंगे तो मुझे बहुत ही खुशी होगी और मुझे बहुत अच्छा भी लगेगा।

वह कहने लगे कि मैं आपके घर पर अवश्य आऊंगा, मैंने उन्हें अपना घर का एड्रेस दे दिया था और उन्हें अपना फोन नंबर भी दे दिया। मैंने उन्हें कहा कि यदि आपको कोई भी समस्या हो तो आप मुझे फोन कर दीजिए मैं आपको रिसीव करने के लिए अपने घर से बाहर आ जाऊंगी, जो यह बात मैंने अरविंद सर से कहीं तो वह बहुत खुश हो गए। सुबह के वक्त मैं नहा धोकर फ्रेश हो रही थी,  उसी वक्त मुझे अरविंद सर का फोन आया और वह कहने लगे कि मैं आपके घर के बाहर खड़ा हूं लेकिन मुझे आपके घर का सही पता नहीं मिल पा रहा है, मैंने बाहर कई लोगों से पूछा लेकिन वह मुझे सही से बता नहीं पा रहे हैं। मैं जब बाहर गई तो मैंने अरविंद सर को देख लिया था और जैसे ही मैंने उन्हें देखा तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगे और वह दूर से ही मुझे हाथ दिखा रहे थे, मैंने भी उन्हें हाथ दिखाते हुए इशारा किया कि आप हमारे घर पर आ जाइए। अब वह हमारे घर पर आ गए और मुझसे कहने लगे कि मैं थोड़ा रास्ता भटक गया था इसलिए मुझे सही से पता नहीं चल पा रहा था कि कौन सा सही रास्ता है और कौन सा गलत रास्ता है फिर मेरी किसी व्यक्ति ने मदद की और उसके बाद मैं आपके घर के पास पहुंच गया। जब वह मेरे घर पर बैठे हुए थे तो मैंने उन्हें पानी पिलाया और उसके बाद मैं उनसे काफी बात कर रही थी, वह मुझसे कहने लगे कि आपके घर पर कोई भी नहीं है, मैंने उन्हें कहा कि मेरी मम्मी आज स्कूल गई है और वह कुछ देर बाद ही घर लौटेंगे। हम दोनों के बीच काफी बातें हो रही थी, मुझे उनसे बात करते हुए बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वह सोफे पर बैठे हुए थे मैं भी उनके पास में ही बैठ गई। जब मैं उनके पास बैठी तो उनके शरीर से बहुत गर्मी निकल रही थी और वह पसीना पसीना हो रखे थे मैंने जैसे ही उनके पैर पर हाथ रखा तो उनका शरीर को गर्म हो गया और उन्होंने भी मेरी जांघ पर हाथ रख दिया जैसे ही उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रखा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उनकी पैंट को खोलते हुए उनके लंड को बाहर निकाल लिया उनका बहुत ही मोटा और लंबा था।

मैंने काफी देर तक उसे अपने हाथ से हिलाया और उसके बाद मैंने अपने मुह के अंदर समा लिया उनका लंड मेरे मुंह के अंदर चला गया। मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और मेरे शरीर से गर्मी बाहर निकलने लगी उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे और मुझे नंगा कर दिया जब मैं नंगी हो गई तो उन्होंने मेरे चूचो को दबा दिया मेरी योनि से पानी निकलने लगा। उन्होंने मेरी योनि को भी चाटना शुरू कर दिया जब उन्होंने मेरी योनि को चाटा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मेरी योनि से पूरा पानी निकल रहा था। उन्होंने मुझे सोफे पर लेटा दिया और मेरे दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया जब उन्होंने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा किया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। जैसे ही उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मैं चिल्लाने लगी और मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाज निकल पड़ी मै मचल रही थी तो उन्हें भी बड़ा आनंद आ रहा था। जब मैं मचलती तो वह मुझे उतनी ही तेजी से धक्के देते काफी देर तक मुझे उन्होंने चोदा। उसके बाद उन्होंने मुझे उल्टा लेटा दिया और मेरी योनि के अंदर अपना लंड डाल दिया जैसे ही उनका लंड मेरी योनि के अंदर घुसा तो मैं चिल्लाने लगी मेरी चूत से खून भी निकलने लगा था लेकिन उन्होंने मुझे बिल्कुल भी नहीं छोड़ा और वह मुझे ऐसे ही धक्के दिए जा रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था जब वह इस प्रकार से मुझे धक्के देते और वह मेरे यौवन का रसपान कर रहे थे। उन्होंने मुझे इतनी देर तक चोदा कि मेरी योनि से भी गर्मी बाहर निकलने लगी उनका लंड भी छिल चुका था इसलिए उनका माल मेरी योनि के अंदर ही गिर गया और वह मेरे ऊपर ही काफी देर तक लेटे रहे।