पारुल की मदमस्त चूत का नशा

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मेरा नाम पवन है मैं जालंधर का रहने वाला हूं, मेरे पापा की कपड़ों की दुकान है और मैं जब कॉलेज से आता हूं तो उनकी दुकान में ही काम देख लेता हूं क्योंकि मुझे मेरे पापा के साथ दुकान में बैठना बहुत अच्छा लगता है इस वजह से मैं उनके साथ दुकान में बैठ जाया करता हूं। कभी मेरे साथ कोई दोस्त होता है तो वह भी मेरे साथ दुकान में ही बैठ जाता है। मेरे जितने भी दोस्त हैं वह सब मेरे पापा की दुकान से ही खरीदारी करते हैं क्योंकि मेरे पापा लड़के और लड़कियों के कपड़े रखते हैं। वह जो भी नया फैशन आता है वह उसे अपनी दुकान पर रखवा लेते हैं। मेरी मम्मी भी बहुत ज्यादा मॉडर्न है और वह अपने कॉलेज टाइम में कॉलेज की सबसे सुंदर लड़की थी। यह बात अक्सर मेरे पापा कहते रहते हैं और वह कहते हैं कि किस प्रकार से मैंने तुम्हारी मम्मी को प्रपोज किया था।

मुझे तुम्हारी मम्मी को मनाने में बहुत समय लगा क्योंकि तुम्हारी मम्मी बिल्कुल भी मेरी बात नहीं मान रही थी और मैं एक सिंपल सा लड़का था लेकिन मुझे तुम्हारी मम्मी पहले ही नजर में पसंद आ गई इसलिए मैंने सोचा कि यदि शादी करूंगा तो सिर्फ तुम्हारी मम्मी से ही शादी करूंगा और फिर काफी मेहनत के बाद जब तुम्हारी मम्मी मान गई लेकिन हम दोनों की शादी में भी उसके बाद की अड़चनें आई, तुम्हारे नाना इस शादी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। उस वक्त मेरे पास कुछ भी नहीं था और मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था इसलिए वह कहने लगे कि यदि तुम लोग शादी कर लोगे तो तुम लोग एक दूसरे के साथ कैसे खुश रहोगे, जब तुम्हारे पास कुछ काम ही नहीं है। मैंने उन्हें कहा कि ऐसी बात नहीं है यदि मैं शादी करूंगा तो मैं कुछ ना कुछ काम तो जरूर करूंगा। मैंने जब यह बात अपने पिताजी को बताई तो वह कहने लगे कि मैं तुम्हें कुछ पैसे दे देता हूं और तुम उससे अपना कुछ काम शुरू कर लो। मैं अपना ही कुछ काम करना चाहता था।

जब मैंने अपना काम शुरू किया तो मुझे उसके लिए बहुत ही दिक्कत झेलनी पड़ी, मैं बाहर से ही सामान लाता था और नया नया सामान रखता था जिस वजह से मेरी दुकान काफी चलने लगी थी और मेरे पिताजी भी इस बात से बहुत खुश थे। इस प्रकार से तुम्हारी मम्मी  और मेरी शादी हो गई। जब तुम्हारे मम्मी से मेरी शादी हुई तो उसके बाद मेरा काम भी बहुत चलने लगा और धीरे-धीरे मैं सब कुछ जोड़ता उड़ता चला गया। मुझे मेरे पापा बहुत ही प्यार करते थे क्योंकि मैं घर में इकलौता हूं इस वजह से वह मेरी हर चीजों को पूरा करते थे और कहते थे कि जो चीजें मुझे अपनी जिंदगी में नहीं मिल सकी, वह मैं तुम्हें जरूर देना चाहता हूं इसी वजह से वह मुझे सब कुछ समय से पहले ही दे देते थे। मेरे कॉलेज के जितने भी दोस्त हैं वह सब बहुत ही अच्छे हैं और वह अक्सर मेरे घर पर आते आते रहते हैं। हम लोगों का जो भी ग्रुप है वह बहुत अच्छा है। एक बार मेरे पापा और मम्मी कहने लगे कि हम लोग शादी में जा रहे हैं यदि तुम भी हमारे साथ चलना चाहते हो तो चल सकते हो। मैं वैसे उन लोगों के साथ शादी में कम ही जाता था पर इस बार मैंने कहा चलो मैं आपके साथ चल लेता हूं क्योंकि मेरे पास उस वक्त कुछ भी काम करने के लिए नहीं था और ना ही मेरे दोस्त यहां पर थे, वह सब लोग छुट्टियों में अपनी फैमिली के साथ घूमने गए हुए थे इसी वजह से मैं उनके साथ शादी में चला गया। जब मैं उनके साथ शादी में गया तो मैं वहां किसी को भी नहीं पहचानता था और मैं बहुत बोर हो रहा था लेकिन मेरे पापा मेरे ही साथ थे और उनके भी परिचय के उन्ही के कोई उनके दोस्त मिल गए और वह उनके साथ चले गए इसलिए मुझे लग रहा था कि मैं अकेला हो गया हूं। मैं इधर उधर घूम रहा था और मेरी मम्मी भी अपनी सहेलियों के साथ थी। मेरी मम्मी मुझे कहने लगी कि तुम मेरे साथ ही रहो, तुम इधर-उधर कहां जा रहे हो। अब मैं अपनी मम्मी के साथ ही था। हम लोग साथ में ही बैठे हुए थे और उनकी सहेलियां भी थी। तभी मेरी मम्मी की एक पुरानी सहेली उन्हें मिली और वह कहने लगी कि तुम इतने सालों से कहां थी, मेरी मम्मी की सहेली कहने लगी कि मेरे पति की सरकारी नौकरी है इसलिए उनका अलग-अलग जगह ट्रांसफर होता रहता है। अभी कुछ समय पहले ही जालंधर में ट्रांसफर हुआ है।

उनके साथ एक लड़की भी थी जो कि मुझे बहुत अच्छी लगी। जब मेरी मम्मी ने अपनी सहेली से मेरा परिचय करवाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा और जब उनकी लड़की से भी मेरा परिचय हुआ तो मैं अंदर ही अंदर से अपने आपको खुश महसूस कर रहा था क्योंकि मैं भी चाहता था मैं उस लड़की से बात करूं। मैंने अपनी मम्मी की सहेली से पूछ लिया कि आप की लड़की का क्या नाम है, वह मेरी मम्मी को कहने लगी की यह तो बहुत ही ज्यादा बोलने वाला लगता है और वह लोग हंसने लगे। मैंने कहा कि मैं बोर हो रहा हूं तो क्या मैं उनके साथ रह सकता हूं। पारुल मेरे साथ ही थी। मुझे उसकी कंपनी बहुत पसंद आ रही थी। पहले वह मुझसे कुछ ज्यादा बात नहीं कर रही थी परंतु धीरे-धीरे वह भी मुझसे बात करने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुम क्या करती हो, तो वह कहने लगी कि मैं अभी कॉलेज कर रही हूं। मैंने उसे बताया कि मैं भी कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं। अब वो मुझसे इतना ज्यादा फ्रैंक हो गई थी की वह अपने दोस्तों की फोटो भी मुझे दिखाने लगी और कहने लगी कि हम लोग कुछ दिन पहले ही घूमने गए थे,  मैं उसकी फोटो तुम्हें दिखाती हूं। वह मुझे अपने दोस्तो की फोटो दिखा रही थी, मैंने भी उसे अपनी कुछ पुरानी फोटो दिखाई, जिसमें कि हम लोग भी कहीं घूमने गए थे। मेरे साथ मेरे दोस्त भी थे। मैं उसे अपने सारे दोस्तों के नाम बता रहा था और वह भी बड़े ध्यान से मेरी तरफ देखे जा रही थी।

मुझे पारुल से बात करने में बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने उस दिन उससे उसका नम्बर भी ले लिया और कहा कि तुम यहां पर नई हो इसलिए तुम्हें जब भी कोई जरूरत हो तो तुम मुझे फोन कर देना। पारुल कहने लगी ठीक है मुझे जब भी कोई जरूरत होगी तो मैं तुम्हें फोन कर दूंगी। फिर वह अपनी मम्मी के साथ चली गई और वह लोग घर जा चुके थे। मेरे पापा भी कहने लगे कि हम लोग भी घर चलते हैं क्योंकि काफी लेट हो चुका है और हमें घर जाने में लेट हो जाएगी। अब हम लोग भी अपने घर के लिए लौट आये। मैं रात भर पारुल के बारे में सोच रहा था और मेरे दिमाग में सिर्फ उसकी तस्वीर चल रही थी। मैं बैठे बैठे अपने फोन को देखने लगा और मैंने पारुल को फोन किया तो उससे मैंने पूछा की क्या तुम लोग घर पहुंच गए हो, वो कहने लगी कि हां हम लोग घर पहुंच गए हैं। मैंने उसे बताया कि हम लोग भी कुछ देर पहले ही घर लौटे हैं। पारुल से मेरी सिर्फ फोन पर ही बात हो पा रही थी, बाकी उससे मेरा मिलना नहीं हो पा रहा था और ना ही उसके बाद उसकी और मेरी मुलाकात हुई थी लेकिन मैंने सोचा कि क्यों ना हम आपस में मिल लेते है। मैंने उससे पूछा क्या तुम्हारे पास समय है, तुम मुझे मिल सकती हो तो मैं भी तुम्हें मिल लेता हूं। वह कहने लगी कि मेरे पास तो समय ही समय है, मैं अपने कॉलेज से सीधा तुमसे मिलने आ जाऊंगी। मैं पारुल को लेने के लिए उसके कॉलेज के बाहर चला गया। जब वह मुझे मिली तो बहुत ही खुश हो गई और उसने मुझे देखते ही गले लगा लिया। अब हम दोनों उस दिन कॉलेज से चले गए। वह मेरे साथ मेरी बाइक पर बैठी हुई थी और वह मुझसे बिल्कुल चिपक कर बैठी हुई थी। उसके स्तन मुझसे टकरा रहे थे उसने मुझे कसकर पकड़ा हुआ था। उसके स्तनों से बहुत गर्मी निकल रही थी और मैंने बड़ी तेजी से बाइक भगाई और उसके बाद मैं सीधा ही अपने दोस्त के घर पर चला गया। मैं जब उसके घर पर गया तो उसके घर पर कोई भी नहीं था मैंने उसे कहा मुझे तुम्हारे घर की चाबी चाहिए उसने मुझे घर की चाबी दे दी और वह कहीं बाहर चला गया।

मैं जब अपने साथ पारुल को ले गया तो हम दोनों साथ में ही बैठे हुए थे मैं उसकी जांघों को सहलाते हुए उसकी गांड की को दबाने लगा। मैंने उसकी गांड को बहुत जोर से दबाया वह पूरी मूड में आ गई मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए हिलाना शुरू कर दिया और कुछ देर बाद पारुल ने उसे हिलाते हिलाते अपने मुंह में ले लिया। उसने मेरे लंड को अपने मुंह में जैसे ही लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ अब मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों का रसपान करने लगा। मैंने उसके स्तनों का बहुत ही अच्छे से रसपान किया मैंने उसके स्तनों पर दांत भी मार दिए थे उसके स्तनों से खून निकल रहा था और मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी योनि को चाटना शुरू कर दिया मैंने उसकी योनि को बहुत अच्छे से चाटा। जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्ला उठी और उसकी सील टूट चुकी थी उसकी योनि से खून निकलने लगा और मैं उसे बड़ी तेज गति से चोद रहा था उसके मुंह से बहुत तेज आवाज निकल रही थी मैं भी उससे उतनी ही तेजी से धक्का दिए जा रहा था। वह कहने लगी तुम्हारा तो बहुत ज्यादा मोटा है मैंने उसे बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया और उसकी योनि से खून निकल रहा था। मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को जैसे ही डाला तो उससे बहुत ज्यादा गर्मी निकल रही थी। मैंने उसे बड़ी तेज तेज धक्के दिए लेकिन मैं ज्यादा समय तक उसकी गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा वीर्य पतन पारुल की योनि में ही हो गया। मुझे उसके बाद उसे गोलियां खिलानी पड़ी क्योंकि वह प्रेग्नेंट हो गई थी।