पड़ोस की लड़की को होटल में ले जाकर चोदा

hindi sex stories

मेरा नाम साकेत है, मैं रामपुर का रहने वाला हूं। मेरे पिता एक सरकारी कर्मचारी थे और अब वह रिटायर हो चुके हैं। मेरी भी स्कूल की पढ़ाई पूरी हो चुकी है इसी वजह से मेरे पिता मुझे कहने लगे कि तुम अपने भाई के पास ही चले जाओ, तुम यहां पर कुछ पढ़ाई नहीं कर पाओगे। मेरी मां भी यही चाहती है और वह कहने लगी कि तुम अपने भैया के पास ही चले जाओ क्योंकि वह एक अच्छे शहर में रहते हैं और वहां पर तुम्हें बहुत अच्छे से आगे की पढ़ाई करने का मौका मिल जाएगा। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप इस बारे में भैया से एक बार बात कर लीजिए। मेरे भैया का नाम अमित है और वह लोग पुणे में रहते हैं। मेरी भाभी ममता भी उनके साथ ही रहती हैं उनकी शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं और वह दोनों पुणे में ही रह रहे हैं।

मेरी भाभी भी जॉब करती है और भैया भी पुणे में ही जॉब करते हैं इसीलिए मेरे पिता चाहते हैं कि मैं भी पुणे ही चले जाऊं। जब मेरे पिता जी ने भैया से बात की तो वो कहने लगे कि ठीक है आप साकेत को हमारे पास ही भेज दीजिए मैं उसका एक अच्छे कॉलेज में एडमिशन करवा दूंगा। जब उन्होंने यह बात पिता जी से कहीं तो वह मुझे कहने लगे कि तुम्हारे भैया ने मुझे कहा कि वह तुम्हारे लिए कोई अच्छा कॉलेज देख लेंगे और तुम वही पर एडमिशन ले लेना। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं कुछ समय बाद पुणे चला जाऊंगा। मेरे भैया ने मेरे लिए टिकट भी करवाई और कहने लगी कि तुम अगले महीने हमारे पास आ जाना और उसी दौरान मैं अपने दोस्तों के साथ बहुत घूमता रहा क्योंकि उसके बाद शायद मुझे रामपुर आने का कमी समय मिल पाता इसीलिए मैं अपने दोस्तों के साथ घूमता रहता था। मेरे पापा भी मुझे कुछ नहीं कह रहे थे क्योंकि उन्हें भी पता था कि उसके बाद मैं पुणे चला जाऊंगा और वहां से काफी समय बाद ही मेरा लौटना होगा इसीलिए वह मुझे कुछ भी नहीं कह रहे थे।

जब यह बात मैंने अपने दोस्तों को बताई तो वो कहने लगे तुम पुणे चले जाओगे तो हम लोग कैसे तुम्हारे बिना टाइम पास किया करेंगे क्योंकि तुम्हारे साथ हम बहुत ही मजे करते है और हम लोग कभी भी कोई प्लान घूमने का बना लेते हैं। मैं भी कहीं ना कहीं दुखी हो रहा था क्योंकि मेरे स्कूल के दोस्त बहुत ज्यादा दुखी थे और कह रहे थे कि तुम चले जाओगे तो हम लोगों का मन बिल्कुल भी नहीं लगेगा लेकिन मुझे तो जाना ही था और मैंने भी अपना सामान पैक कर लिया और मैं पुणे पहुंच गया। जब मैं पहुंचा तो मैंने भैया को फोन किया और वह मुझे लेने के लिए स्टेशन आ गए। जब वो स्टेशन आए तो मुझे देखते ही उन्होंने गले लगा लिया और कहने लगे कि तुम्हारा कैसा रहा, मैंने उन्हें कहा कि सफर तो बहुत ही अच्छा था, मुझे किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई। मेरी मां ने भैया के लिए कुछ सामान भेजा था तो मैंने उन्हें वह दिया और  कहा की यह तुम्हें माँ ने भिजवाया है। भैया कहने लगे कि मां अभी भी मेरी कितनी चिंता करती है और उसके बाद हम दोनों उनके घर पर आ गए। जब हम लोग उनके घर पर आए तो मेरी भाभी भी मुझे देख कर बहुत खुश हुई और कहने लगी कि तुम काफी समय बाद मुझसे मिल रहे हो, मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैंने कहा कि भाभी मुझे आप को मिले हुए भी तो काफी समय हो चुका है और वह बहुत ही ख़ुश थी। मै भी बहुत ज्यादा खुश था और मैंने भाभी से कहा कि मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है पुणे आकर क्योंकि पुणे का मौसम बहुत ही अच्छा है। अब वह लोग कहने लगे कि आज हम लोग बाहर ही खाना खाने जाएंगे क्योंकि तुम इतने समय बाद आए हो इसलिए हम लोग आज बाहर ही डिनर करेंगे। अब शाम हो चुकी थी और हम लोग बाहर डिनर करने के लिए चले गए। जब हम लोग बहार गए तो वहां का मौसम बहुत ही सुहावना था और शहर भी बहुत अच्छा था। मुझे नये शहर में आकर कुछ अलग ही तरीके से फीलिंग आ रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं भैया लोगों के साथ में डिनर कर रहा था। मेरी भाभी मुझसे पूछने लगी कि तुम क्या लोगे, तो मैंने उन्हें अपने खाने का ऑर्डर दे दिया और उन लोगों ने भी अपने अपने हिसाब से अपने खाने के लिए आर्डर दिया।

अब हम लोग डिनर करने के बाद वहां से घर लौट आए और घर में काफी देर तक हम लोग बात करते रहे। भैया भी मुझसे रामपुर के बारे में पूछ रहे थे और मैंने भी उन्हें बताया कि आपके दोस्त भी आपको बहुत याद किया करते हैं और जब भी मुझे मिलते हैं तो वह आपके बारे में जरूर पूछते हैं। भैया भी बहुत खुश थे और भाभी भी बहुत ज्यादा खुश थी। थोड़ी देर बाद हम लोग सो गए। अब मेरा समय पुणे में बीतने लगा और मेरे भैया ने मेरा एडमिशन भी करवा दिया था। अब मैं आस पास के लोगों को भी पहचानने लगा था क्योंकि वह लोग भैया को बहुत ही अच्छे से जानते थे इसलिए सब लोगों से मेरा परिचय भी हो चुका था। वहीं पड़ोस में एक गिरीश नाम के व्यक्ति रहते थे वह बहुत ही मजाकिया किस्म के व्यक्ति थे। मैं भी उनसे एक आद बार मिला था लेकिन उनसे जितनी भी बार मिला तो उनका व्यवहार बहुत ही अच्छा लगा और वह मुझसे हमेशा ही बात करते थे लेकिन मैंने कभी उनके परिवार वालों से बात नहीं की थी और मुझे पता भी नहीं था कि उनके परिवार में और कौन-कौन रहता है। एक दिन उनके घर से मैंने एक लड़की को निकलते हुए देखा। मुझे बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ की यह गिरीश जी की लड़की है क्योंकि गिरीश जी बिल्कुल ही लगते नहीं है कि उनकी उम्र इतनी ज्यादा होगी।

उनकी लड़की की उम्र भी मेरे जितनी ही थी और वह भी कॉलेज कर रही थी। मेरी उससे भी बात होने लगी और अब हम दोनों अक्सर बात कर लिया करते थे। उसका नाम पूजा है और हम लोग कई बार साथ में ही कॉलेज जाते थे क्योंकि उसका कॉलेज भी मेरे कॉलेज से कुछ दूरी पर ही था और कई बार हमें गिरीश जी ही कॉलेज छोड़ दिया करते थे। एक दिन मेरे भैया ने कहा कि तुम्हें कॉलेज से आने-जाने में तकलीफ होती होगी इसलिए मैं तुम्हारे लिए एक मोटरसाइकिल ले लेता हूं। उन्होंने मेरे लिए एक मोटरसाइकिल ले ली और अब पूजा और मैं साथ ही कॉलेज जाया करते थे। हम लोगों के बीच में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और एक दिन मुझे पूजा अपने कॉलेज ले गई। जब वह मुझे अपने कॉलेज ले गई तो उसने अपने सारे दोस्तों से मुझे मिलवाया और मैं उसके सब दोस्तों से मिलकर बहुत ही खुश हुआ क्योंकि उसके दोस्त बहुत ही अच्छे नेचर के थे और जब मैंने पूजा से इस बारे में बात की तो वह कहने लगी कि मेरे सारे दोस्त बहुत ही अच्छे हैं। मैंने भी उसे कह दिया कि तुम भी बहुत अच्छी हो और वह मेरी बात से हंसने लगी वह मेरे इसारे समझ चुकी थी। उसे समझ आ चुका था कि मेरे दिल में उसके लिए कुछ चल रहा है। अब हम दोनों ऐसे ही हमेशा कॉलेज जाते रहे और हम दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। मैं अक्सर पूजा के घर भी चला जाता था और उसकी मम्मी भी मुझे बहुत अच्छा मानती थी। वह भी कभी हमारे घर पर आ जाया करती और हम दोनों बैठकर अपने कॉलेज के बारे में बात करते थे। वह अपने कॉलेज के बारे में भी बताती थी किसके कॉलेज में किस प्रकार से पढ़ाई होती है और मैं भी अपने कॉलेज के बारे में बताया करता था। जब हम दोनों की छुट्टी होती तो उस दिन हम लोग एक साथ घूमने के लिए चले जाते। हम लोगों ने एक दिन घूमने का प्लान बनाया और मेरे साथ पूजा भी आ गई। हम दोनों उस दिन घूमते हुए अश्लील बातें करने लगे और उसका भी पूरा मूड होने लगा। वह मुझे कहने लगी कि हम लोग कहीं चलते हैं जहां पर हम दोनों साथ में समय बिता पाए। मैंने एक होटल में रूम ले लिया और मैं उसे अपने साथ ले गया। वह होटल के रूम में आने से थोड़ा घबरा रही थी लेकिन मैंने वहां पर रूम लेने के बाद हम दोनों रूम में चले गए। अब मैंने उसके होठों को अपने होठों में लेकर किस करना शुरू कर दिया और उसे बहुत ही अच्छे से किस कर रहा था। मै उसके होठों का रसपान कर रहा था मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जब मैं उसके होठों को अपने होठो में लेकर चूसता तो उसे बहुत ही अच्छा लगता। मैंने उसके कपड़े जैसे ही उतारे तो उसकी गांड का साइज 36 के आस पास होगा मैंने जैसे ही उसकी गांड पर अपना हाथ लगाया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया और वह मेरे लंड को अच्छे से चूसने लगी।

कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया और उसकी योनि को कुछ देर तक मैंने चाटा जिससे कि उसके अंदर की उत्तेजना भी बढ़ चुकी थी और मैंने जैसे ही उसके दोनों पैरों को खोला तो उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने अब उसकी चूत मे अपने लंड को लगाते हुए अंदर डालना शुरू किया। मैंने जैसे ही उसकी चूत मे धक्का दिया तो वह बहुत खुश हो गई और उसकी सील टूट चुकी थी। मैं जैसे ही उसे धक्के मारता तो वह अपने मुंह से मादक आवाज निकालती और पूरे मूड में आ जाती। मैंने उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के मारने शुरू कर दिए जिससे कि उसकी योनि से बहुत तेज खून निकल रहा था और वह भी मेरा पूरा साथ ही रही थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसे झटके देता जाता। उसने भी अपनी चूत को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया और मैं भी उसे तेजी से चोद रहा था लेकिन उन झटकों के बीच में मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। जब मेरा माल गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकालते हुए हिलाना शुरू कर दिया। मेरे लंड से मेरा वीर्य इतनी तेजी से उसके स्तनों पर गिरा मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा वह भी बहुत ही खुश हो गई।