पड़ोस की दोस्त की बहन

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मेरा नाम संजीव है और मैं बनारस का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 23 वर्ष है मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूं। यह मेरे कॉलेज का आखरी वर्ष है इसलिए मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई बहुत ही अच्छे से कर रहा हूं क्योंकि यह मेरा आखरी वर्ष है और मैं नहीं चाहता कि इस वर्ष मेरे कम नंबर आए। मेरे साथ ही मेरा एक दोस्त भी पड़ता है जो कि हमारे पड़ोस में ही रहता है, उसका नाम संजय है। वह मेरा बहुत ही घनिष्ट मित्र है। हम दोनों साथ में ही रहते हैं और मुझे संजय के साथ रहना बहुत ही अच्छा लगता है। मैंने उसे बताया कि इस वर्ष मैं बहुत ही मेहनत करना चाहता हूं क्योंकि यदि इस वर्ष मेंरी अच्छी परसेंटेज आ गई तो मैं अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सकता हूं। संजय मुझे कहता कि मैं भी यही चाहता हूं इसीलिए मैं अच्छे से पढ़ाई करना चाहता हूं।

संजय और मेरे घर वाले एक दूसरे से अच्छे से परिचित हैं और हम लोग एक दूसरे के घर में अक्सर आया करते थे। मेरा संजय के घर में उठना बैठना पहले से ही था। एक दिन संजय की बहन भी आई हुई थी, वह अपने मामा के साथ दिल्ली में रहती है और वह वहीं से पढ़ाई कर रही है क्योंकि वह पढ़ने में बहुत ही अच्छी है इसलिए उसके मामा ने कहा कि उसे दिल्ली ही भेज दो और वह दिल्ली में ही पढ़ाई करती है। मैं उसे बचपन से ही देखता रहता था क्योंकि वह मुझे बचपन से ही अच्छी लगती थी। हम लोग बचपन में भी साथ में खेला करते थे लेकिन अब हम लोग बड़े हो चुके हैं इसलिए साथ में नहीं खेल सकते परंतु जब मुझे सुमन दिखी तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मैं उसे कहने लगा की तुम दिल्ली से कब लौटे, वो कहने लगी कि बस कुछ ही दिन हुए हैं मुझे दिल्ली से आए हुए। मैंने सुमन से कहा कि संजय ने मुझे इस बारे में नहीं बताया। जब मैंने संजय से इस बारे में पूछा तो वह कहने लगा कि मेरे दिमाग से बात निकल गई और मैं तुम्हें बिल्कुल भी नहीं बता पाया। सुमन के दिल में भी मेरे लिए कुछ था लेकिन हम दोनों ही एक दूसरे को कभी भी नहीं कह पा रहे थे क्योंकि मुझे उसे देखकर साफ प्रतीत होता था कि वह भी मेरे बारे में कुछ तो सोचती है।

मैंने सुमन से पूछा कि तुम कितने दिनों तक बनारस में रहने वाली हो, वो कहने लगी कि मैं अभी कुछ समय तक बनारस में ही रहूंगी और उसके बाद ही मैं दिल्ली जाऊंगी। मैंने उसे उसकी पढ़ाई के बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि मेरी पढ़ाई अच्छे से चल रही है और मैं अपनी पढ़ाई में बहुत ध्यान दे रही हूं। मुझे सुमन से बात करना बहुत ही अच्छा लगता था और मैंने संजय से कहा कि यदि तुम घूमने का प्लान बनाओ तो हम तीनो लोग कहीं घूमने चलते हैं, मैं अपने पापा से उनकी कार ले लूंगा और हम तीनों साथ में घूमने चल पड़ेंगे। जब मैंने यह बात संजय से कहीं तो वह बहुत खुश हो गया क्योंकि वह काफी समय से कहीं घूमने नहीं गया था और मुझे कहने लगा कि मुझे भी काफी समय हो चुका है कहीं घूमे हुए। मैंने उसे कहा कि हम लोग वाटर पार्क चलते हैं और जब मैंने सुमन से पूछा तो वो कहने लगी कि यह तो तुमने बहुत ही अच्छा सुझाव दिया क्योंकि मैं भी काफी समय से कहीं घूमने नहीं गई थी। दिल्ली में भी मुझे बिल्कुल समय नहीं मिल पाता इसीलिए मैं कहीं भी नहीं जाती और मैं वहां पर पढ़ाई में ही लगी रहती हूं। मैंने उन दोनों से पूछा कि हम लोगों को कब चलना चाहिए तो वो कहने लगे कि हम लोगों को अगले रविवार के दिन वाटर पार्क में चलना चाहिए। हम लोगों ने अब अगले रविवार का प्लान बना लिया और हम तीनों ही वहां घूमने चले गए। जब हम तीनों वहां पहुंचे तो हमने वाटर पार्क की टिकट ली। अब हम तीनों वहां जमकर मस्ती कर रहे थे और मैं सुमन के साथ बैठ कर बात भी कर रहा था। जब मैंने संजय से इस बारे में पूछा की तुम्हे कैसा लग रहा है। तो वह कहने लगा कि मुझे तो बहुत ही अच्छा लग रहा है  तुमने यह बहुत ही अच्छा प्लान बनाया क्योंकि हम लोग काफी वक्त से कहीं साथ में भी नहीं गए थे और सुमन तो बहुत ही ज्यादा खुश थी। जब सुमन मेरे साथ बैठी हुई थी तो मैंने सुमन का हाथ पकड़ लिया और वह मुझसे अपना हाथ छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसके हाथ को कसकर पकड़ लिया और वह अपने हाथों को मुझसे छुड़ा नहीं सकी।

वह मुझे कहने लगी कि तुमने मेरा हाथ जोर से क्यों पकड़ लिया, फिर मैंने उसे पूछ ही लिया कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ है या नहीं। वह मुझसे कहने लगी कि मैं तुम्हारे बारे में कभी भी ऐसा नहीं सोचती, मैंने उससे कहा कि मैंने तुम्हारी आंखों में देखा है तुम मेरे बारे में कुछ तो ऐसा सोचती हो लेकिन सुमन बिल्कुल भी मानने को तैयार नहीं थी और उसके बाद उसने मुझसे अपना हाथ छुड़ा लिया और वह संजय के साथ चली गई। अब वह दोनों साथ में ही थे और सुमन मुझे दूर से ही देख कर मुस्कुरा रही थी। मुझे यह बात अच्छे से पता थी कि उसके दिल में मेरे लिए कुछ तो है लेकिन वह कहना नहीं चाहती और मुझे भी कहीं ना कहीं संजय की वजह से लगता था कि यदि मैं उससे इस प्रकार की बात करूंगा तो कहीं संजय को बुरा ना लग जाए इसीलिए मैं चाहता था कि पहले सुमन ही मुझसे अपने दिल की बात कहे और उसके बाद ही मैं अपने रिलेशन को आगे बढ़ाऊँ लेकिन सुमन ने मुझे नहीं कहा और उस दिन हम लोग अपने घर वापस लौट गए। अब मैं अपने कॉलेज की पढ़ाई में ही व्यस्त था और संजय भी कभी मेरे घर पर आ जाया करता था। एक दिन संजय ने मुझे कहा कि तुम मेरे घर पर ही आ जाया करो, मैंने उसे कहा कि तुम्हारे घर पर मैं कल आऊंगा क्योंकि आज मैं पापा के साथ कहीं जा रहा हूं।

मैं अगले दिन संजय के घर चला गया। सुमन भी वहीं बैठी हुई थी और हम तीनों आपस में बैठकर बात कर रहे थे, तभी संजय कहने लगा कि मैं बाहर से कुछ सामान ले आता हूं और वह सामान लेने के लिए चला गया। सुमन और मैं बात कर रहे थे, मैंने उस दिन सुमन से दोबारा से पूछा कि क्या तुम मेरे बारे में कुछ सोचती हो, तो वह कहने लगी कि मेरे दिल में तुम्हारे लिए कुछ भी ऐसा नहीं है तुम गलत सोच रहे हो। मैंने उसे कहा कि मैं गलत नहीं हो सकता क्योंकि मुझे तुम्हारी आंखों में साफ साफ दिखाई देता है, लेकिन वह अब भी मानने को तैयार नहीं थी और मैंने उस दिन से उससे बात करना ही बंद कर दिया क्योंकि मै सोच रहा था कि अब वह मुझसे खुद बात करेगी तो भी मैं उससे बात नही करूंगा इसलिए मैंने उससे बात करना बंद कर दिया और मैं अब संजय के घर पर भी नहीं जा रहा था। संजय मुझे कई बार कहता कि तुम मेरे घर पर क्यों नहीं आ रहे हो तो मैं उससे कुछ ना कुछ बहाना बना देता और उसे कहता कि मैं आजकल घर में ही पढ़ाई कर रहा हूं इसीलिए तुम्हारे घर नहीं आ सकता। अब संजय भी मेरे पास नहीं आता था और हम दोनों कॉलेज में ही मिलते थे। कॉलेज में ही हम दोनों की बात हो जाती और मैं अब अपनी पढ़ाई में ही लगा हुआ था। जब संजय मुझसे कॉलेज में मिलता तो मैं उसे सुमन के बारे में पूछ लेता हूं। मैंने उसे पूछा कि वह दिल्ली कब जा रही है। वह कहता कि वह अभी कुछ समय और रहेगी, उसके बाद ही वह दिल्ली लौटेगी। संजय और मैं कैंटीन में ही बैठे रहते थे और अपनी क्लास पूरी करने के बाद हम लोग कॉलेज से घर चले जाते हैं। मेरी सुमन से कई दिनों तक बात नहीं हो रही थी तो एक दिन वह मेरे घर पर ही आ गई और मुझसे कहने लगी कि तुम तो मुझसे बात ही नहीं कर रहे हो। मैंने उसे कहा कि जब हमारे बीच में कोई संबंध ही नहीं है तो मैं तुम से क्या बात करूं मेरा तुमसे बात करने का कोई तुक भी नहीं बनता। उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और मेरे हाथों को चूमने लगी उसने मेरे हाथों को बहुत देर चूमा उसके बाद उसने मेरे होठों को किस करना शुरू कर दिया।

मैं उसके अंदर की भावना को समझ चुका था मैंने उसके होठों को बहुत तेजी से किस करना शुरू कर दिया। उसके होठों से खून आने लगा  मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था जब मैं उसे किस कर रहा था। मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया जैसे ही मैंने उसकी चूत को देखा तो उस पर एक भी बाल नहीं था और उसके स्तन भी बहुत मुलायम थे। मैंने उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर काफी देर तक चूसा उसके बाद उसकी योनि को भी मैंने अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया जिससे कि उसके अंदर की उत्तेजना पूरी चरम सीमा पर पहुंच गई। उसे बिल्कुल भी नहीं रहा जा रहा था मैंने भी उसे घोड़ी बनाते हुए उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में गया तो उसकी सील टूट चुकी थी और उसे खून निकलने लगा। मैंने उसे बड़ी तेज तेज चोदना शुरू कर दिया वह अपने मुंह से बड़ी तेज आवाज निकालने लगी वह बड़ी तेजी से सिसकियां ले रही थी। मुझसे भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था लेकिन फिर भी मैं उसे धक्के मारने पर लगा हुआ था। कुछ देर बाद वह भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी मैं भी उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा। मैंने उसे तेज तेज झटके देने शुरू किए तो उसका शरीर पूरा हिलने लगा। मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटाते हुए उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया और जैसे ही मैंने उसकी योनि में अपने लंड को डाला तो वह चिल्ला उठी और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। मैंने उसे इतनी तेजी से चोदा की उसका पूरा शरीर दर्द होने लगा और मेरा वीर्य पतन कुछ ही देर बाद उसकी योनि के अंदर हो गया। मैंने जब अपने लंड को उसकी योनि से बाहर निकाला तो उसे खून निकल रहा था।