पड़ोस के टीचर की लड़की

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मेरा नाम शोभित है और मैं बरेली का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 17 वर्ष है। मेरे पिता बैंक में नौकरी करते हैं। मेरी छोटी बहन मेरे ही स्कूल में पढ़ती है। वह कक्षा 9 में है और मैं 11वीं में पढ़ता हूं। मेरी मम्मी भी जॉब करती है। हम लोग अपने स्कूल से जल्दी घर चले जाते हैं तो हम दोनों में घर पर ही रहते हैं। मेरी मम्मी और पापा दोनों ही शाम के वक्त ऑफिस से घर लौटते हैं। मेरे स्कूल में बहुत ही दोस्त हैं और उनसे मेरी बहुत ही अच्छी दोस्ती है क्योंकि सब लोग मुझे मेरे स्कूल में हीरो कह कर बुलाते हैं और मैं लड़कियों में बहुत ही ज्यादा फेमस हूं क्योंकि सब लड़कियां मुझ पर लाइन मारती हैं इसी वजह से सब लोग मुझे हीरो कह कर बुलाते थे और मुझे भी बहुत अच्छा लगता जब वह लोग मुझे हीरो कहकर संबोधित किया करते हैं।

मैं पढ़ने में भी बहुत अच्छा हूं इसलिए मैं अपनी पढ़ाई में भी पूरा ध्यान देता हूं लेकिन मैं कहीं भी ट्यूशन पढ़ने नहीं जाता और अपने घर पर ही अपनी पढ़ाई करता हूं, जिस वजह से मेरे पापा कई बार मुझे कहते हैं कि तुम्हें यदि कहीं ट्यूशन पढ़ने जाना है तो तुम ट्यूशन पढ़ने जा सकते हो लेकिन मैंने उन्हें मना कर दिया और कहा कि मैं घर पर ही पढ़ाई कर सकता हूं, तो मैं घर पर ही पढ़ लिया करूँगा। मेरे पापा को भी यह बात अच्छे से मालूम है कि मैं घर पर बहुत ही अच्छे से पढ़ाई करता हूं और अपनी छोटी बहन को भी मैं ही पढाता हूं, वह भी पढ़ने में बहुत होशियार है। स्कूल में मेरे सारे टीचर मुझे देख कर बहुत ही खुश रहते हैं और वह मेरी बहन की भी बहुत तारीफ करते हैं। जब मेरे पापा हमारे स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग के समय आते हैं तो मेरे जितने भी टीचर है वह सब मेरी बहुत ही ज्यादा तारीफ करते हैं और कहते हैं कि शोभित एक अच्छा लड़का है इसीलिए मेरे पापा मुझे कभी भी नहीं डांटते। मेरे पिताजी मुझसे बहुत ही खुश रहते है और वह मेरी बहन से भी बहुत खुश हैं। एक बार हमारे पड़ोस में एक टीचर रहने आ गए जो कि हमारे स्कूल में ही हमें पढ़ाते थे लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह हमारे स्कूल के टीचर है। जब वह शुरू में हमारे पड़ोस में आए तो मुझे उनके बारे में नहीं मालूम था लेकिन जब मैंने उन्हें सुबह स्कूल जाते वक्त दिखा तो तब मुझे पता चला कि यह तो हमारे स्कूल में ही टीचर है।

उनका नाम गुलाटी सर है और वह बहुत अच्छा पढ़ाते हैं। वह हमें साइंस पढाया करते हैं और सब बच्चे बहुत ही खुश होते हैं जब वह हमारी क्लास में आते हैं क्योंकि वह बहुत ही मजाक करते हैं और सब बच्चे उन्हें देखकर बहुत खुश होते हैं। उनकी एक लड़की है जिसका नाम अक्षरा है, वह हमारे स्कूल में हमारी सीनियर है। वह क्लास बारहवीं में पढ़ती है और मैं अक्सर उसे देखा करता हूं क्योंकि अक्षरा मुझे बहुत ही अच्छी लगती है लेकिन मेरी उससे कभी भी बात नहीं हो पाई क्योंकि वह सुबह अपने पापा के साथ ही स्कूल  के लिए घर से जाती है और अपने पापा के साथ ही स्कूल से घर लौटती है। मुझे इस लिए बिल्कुल भी अक्षरा से बात करने का मौका नहीं मिल पा रहा था लेकिन मैं उसे किसी ना किसी प्रकार से बात करना ही चाहता था। अब गुलाटी सर और मेरे पिता के बीच में बहुत ही अच्छे संबंध हो गये और वह घनिष्ठ मित्र बन गए थे। गुलाटी सर अक्सर हमारे घर पर आ जाया करते थे और हम लोग भी उनके घर पर चले जाया करते थे। मैं जब भी उनके घर जाता तो सबसे पहले मैं अक्षरा को ही देखा करता था क्योंकि जब तक मै अक्षरा को नहीं देख लेता, तब तक मुझे ऐसा लगता था जैसे मेरी सुबह ही ना हुई हो। अक्षरा और मेरे बीच में भी बात होने लगी थी लेकिन हम दोनों के बीच में अभी भी इतनी ज्यादा बात नहीं होती थी जिससे कि मैं उसे अपने दिल की बात कह सकूं, लेकिन मैं चाहता था कि मैं उसे अपने दिल की बात कहूं। अक्षरा एक बहुत ही अच्छी और बहुत ही सरल किस्म की लड़की थी। वह जब भी स्कूल में आती तो सब से बहुत ही अच्छे से बात किया करती थी। एक दिन मेरे पिता ने गुलाटी सर से बात की और कहने लगे कि यदि आप शोभित को ट्यूशन पढ़ा देंगे तो मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा। गुलाटी सर भी मेरे पापा की बात को मना नहीं कर पाए और उन्होंने मुझे ट्यूशन पढ़ाने के लिए हां कर दी।

जब मैं उनके पास ट्यूशन पढ़ने जाता तो मैं अक्षरा को हमेशा ही देखता रहता था। मुझे उसे देख कर अंदर से एक अलग ही तरीके की फीलिंग आने लगी थी और उसे देखना मुझे बहुत पसंद था। यह बात अक्षरा को भी पता थी इसलिए वह भी मुझे देखती रहती थी। मैंने एक दिन अक्षरा का फोन नंबर ले लिया, जब मैंने उसका फोन नंबर लिया तो मैं उसे फोन करने लगा। वह शुरुआत में मुझसे बात नहीं करती थी लेकिन अब वह मुझसे फोन पर अच्छे से बात कर लिया करती थी। जब भी मैं स्कूल जाता तो मैं अक्षरा से बात कर लेता था और उसके बाद मैं गुलाटी सर के पास ट्यूशन पढ़ने के लिए उनके घर पर आ जाता था। जब मैं ट्यूशन पढ़ने जाता तो मैं अक्षरा को ही देखता रहता था और वह भी मुझे देख कर बहुत खुश होती थी। मैंने एक दिन उसे कहा कि मेरे क्लास के जितने भी दोस्त हैं वह सब घूमने का प्लान बना रहे हैं यदि तुम भी हमारे साथ चलो तो मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा, वो कहने लगी कि मैं तुम्हारे क्लास में किसी बच्चे को नहीं जानती इसलिए मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकती, लेकिन मैंने उसे जबरदस्ती कहा कि तुम्हें आना ही होगा और वह मेरी बात को मना नहीं कर पाई, वो हमारे साथ घूमने के लिए राजी हो गयी। जब हम सब दोस्त घूम रहे थे तो मैं अक्षरा के साथ ही बात कर रहा था। मुझे उसके साथ बात करना बहुत ही अच्छा लग रहा था और वह भी मेरे साथ ही बात कर रही थी।

हमारे क्लास के जितने भी लड़के लड़कियां थी वह सब अपनी बातों में ही लगे हुए थे और मुझे अक्षरा के साथ समय बिताना अच्छा लग रहा था। अब अक्षरा और मैं एक साथ बैठे हुए थे तो मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए उससे उस दिन अपने दिल की बात कह दी, पहले वह मुझे कहने लगी कि मेरे दिल में तुम्हारे लिए ऐसा कुछ भी नहीं है, तुम मेरे बारे में गलत धारणा बना कर बैठे हो लेकिन जब मैंने उसे कहा कि मैंने तुम्हारी नजरों में देखा है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो इसलिए मैंने तुम्हें अपने दिल की बात कही। अब अक्षरा भी अपने आप को रोक ना पाई और उसने भी मुझे कह दिया कि हां मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं लेकिन मैं तुम्हें कभी भी अपने दिल की बात नहीं कह सकी। तुम जब हमारे घर पर ट्यूशन पढ़ने आते हो तो मैं अक्सर तुम्हें देखती हूं। मैं अब इतना ज्यादा खुश था कि मैंने अक्षरा को गले लगा लिया और जब मैंने उसे गले लगाया तो वह भी मुझसे गले मिलकर बहुत ही खुश हो रही थी। मैं रोज की तरह ही गुलाटी सर के पास ट्यूशन पढ़ने जाता तो उस वक्त मुझे अक्षरा दिख जाती और स्कूल में भी अक्षरा से मेरी बात हो जाया करती थी। मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा जब हम दोनों आपस में बात करते थे। अक्षरा को मुझसे बात करना भी बहुत पसंद है और हम दोनों फोन पर भी बात कर लिया करते थे। हम लोग कभी मिल भी लिया करते थे। हम दोनों के बीच में बहुत सारा नज़दीकियां हो गई थी,  जिस वजह से हम दोनों एक दूसरे के बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकते थे और मैं जिस दिन अक्षरा को फोन नहीं करता तो उस दिन मुझे अंदर से एक अलग ही तरीके की बेचैनी हुआ करती थी। मैं रोज की तरह ही गुलाटी सर के पास ट्यूशन पढ़ने गया हुआ था। वह मुझे ट्यूशन पढ़ा रहे थे लेकिन उनके फोन पर किसी का फोन आया और वह जल्दी से तैयार होकर चले गए। वह मुझे कहने लगे कि तुम थोड़ी देर यहां पर बैठे रहो मैं अभी एक जरूरी काम कर कर आता हूं। मैं बैठा बैठा बोर हो रहा था मैं अक्षरा के रूम में चला गया और जब मैं अक्षरा के रूम में गया तो उसकी स्कर्ट के नीचे से उसकी पैंटी दिखाई दे रही थी। मैंने जैसे ही उसकी पैंटी पर अपनी उंगली लगाई तो वह पूरी उत्तेजना में आ गई।

मैंने उसे कसकर पकड़ लिया और उसके होठों को किस करने लगा। जब मैं उसके होठों को किस कर रहा था तो वह भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने जैसे ही उसकी स्कर्ट को ऊठाया तो मै उसकी को चूत को चाटने लगा उसकी योनि से बहुत तेज पानी निकल रहा था और मैंने उसे बहुत देर तक चाटना जारी रखा। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे कहने लगी कि तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दो। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया वह बहुत तेजी से चिल्लाने लगी और उसकी चूत से खून की पिचकारी मेरे लंड पर आ गिरी। मैंने उसे बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू किए और उसके मुंह से बड़ी तेज आवाज निकल जाती। पहले तो उसे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था पर अब वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था जब वह इस प्रकार से अपने मुंह से सिसकिया ले रही थी। कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर से लेटा दिया और जैसे ही मैंने अपने लंड उसकी चूत मे डाला तो वह चिल्ला उठी। मैं उसे बड़ी तेजी से झटके दिया जा रहा था लेकिन काफी देर तक ऐसा करने के बाद वह भी पूरे मूड में आ चुकी थी। वह अपनी चूतडो को मेरे लंड के ऊपर नीचे करने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब वह इस प्रकार से अपनी चूतड़ों को मेरे लंड के ऊपर नीचे कर रही थी। मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था और उसकी योनि से भी बहुत ज्यादा खून का रिसाव हो रहा था लेकिन उसने काफी देर तक ऐसा किया अब उसने अपनी योनि को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया जिससे कि मेरा वीर्य उसकी योनि के अंदर ही गिर गया।