महिलाओं की पार्टी में एक महिला को खुश कर दिया

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मेरा नाम राजा है और मैं गांव में मजदूरी का काम करता हूं, मैं मजदूरी से ही अपना जीवन यापन करता हूं क्योंकि मेरे पिता भी गांव में मजदूरी का ही काम करते थे इसलिए मैं भी मजदूरी का ही काम करता हूं। मैं ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हूं इसलिए मुझे और कोई भी काम नहीं आता। मैं उनके साथ ही मजदूरी का काम करता हूं और हमारे गांव में जब कभी भी किसी को कुछ काम करवाना होता था तो वह लोग हमें ही बुलाते थे, हम लोग गांव में अच्छे से काम किया करते थे और कभी भी हमने किसी का भी काम खराब नहीं किया। हम लोग जो भी काम अपने हाथ में लेते वह पूरे इमानदारी से किया करते थे इसलिए सब लोग हमें ही बुलाते थे।

मैं गांव में इतनी ज्यादा मजदूरी करता था कि उसके चलते मेरा शरीर पूरा सख्त हो चुका था और मैं दो आदमियों के जितना अकेला ही काम कर दिया करता था लेकिन मुझे कई बार लगता था कि मैं शायद इस काम के लिए नहीं बना हूं क्योंकि मजदूरी से ना तो हमें उतना पैसा मिल पाता था और ना ही हमारा घर अच्छे से चल पा रहा था इसी वजह से कई बार मुझे ऐसा प्रतीत होता कि मुझे कुछ अच्छा करना चाहिए लेकिन मैं ना तो ज्यादा पढ़ा लिखा था और ना ही मुझे किसी चीज की समझ थी। मुझे सिर्फ मजदूरी करना ही आता था इसीलिए कई बार मुझे ऐसा लगता था कि यदि मैं जिंदगी भर मजदूरी करता रहा तो अपने पिता की तरह ही एक साधारण सा इंसान बन कर रह जाऊंगा, जो कि दो वक्त की रोजी-रोटी ही कमा सकता है और उससे ज्यादा कुछ भी हम लोग नहीं कर सकते। हम लोग आज भी एक कच्चे मकान में रहते हैं और ना ही हमारा एक पक्का मकान है लेकिन मेरे सोचने से कुछ नहीं होने वाला था और ना ही मुझे कहीं पर कोई काम मिलने वाला था। अब मैं अपने काम में ही लगा हुआ था। एक दिन शहर से एक व्यक्ति आये और उनकी नजर मुझ पर पड़ गई, जब उन्होंने मुझे देखा तो वह कहने लगे कि तुम्हारा शरीर तो बहुत ही ज्यादा सख्त और कठोर है। मैंने उन्हें कहा बस मजदूरी कर के ही मेरा शरीर ऐसा बन गया है। उन्होंने मुझे कहा कि यदि तुम्हें शहर चलना हो तो तुम मुझसे संपर्क कर लेना, उन्होंने मुझे अपना नंबर दे दिया।

मैं पहले सोचने लगा कि मुझे उनके साथ  जाना चाहिए या नही। मैंने काफी सोचने के बाद फैसला कर लिया कि अब मैं शहर में ही कुछ काम करूंगा। मैंने यह बात अपने पिताजी को भी बता दी और उन्हें कहा कि मैं शहर में रहकर ही कुछ काम करने वाला हूं, मैं मजदूरी का काम नहीं करूंगा, यदि मैं कुछ नहीं कर पाया तो उसके बाद मैं वापस आ जाऊंगा लेकिन मैं एक बार तो शहर जाना ही चाहता हूं। मेरे पिताजी ने भी मुझे नहीं रोका क्योंकि वह भी चाहते थे कि यदि मैं अपने जीवन में कुछ अच्छा कर सकूं तो यह मेरे लिए अच्छा होता, नहीं तो मैं भी जिंदगी भर मजदूरी ही करता रह जाता। अब मैं शहर चला गया। जब मैं शहर गया तो मैंने उनको फोन किया। उन्होंने फोन उठाते हुए मुझसे पूछा कि तुम कहां पर हो, मैंने उन्हें बताया कि मैं रेलवे स्टेशन पर खड़ा हूं। वह मुझे रेलवे स्टेशन ही लेने आ गये और अब वह मुझे स्टेशन से अपने घर ले गए। मैं उनके ही घर में रुका हुआ था और उन्होंने एक अलग से कमरा भी मुझे दे दिया। मुझे नहीं पता कि वह मुझे क्या काम करवाने वाले थे लेकिन उन्होंने मुझे कहा कि तुम आज आराम करो और कल सुबह जब तुम तैयार हो जाओगे तो तुम मेरे साथ चलना। उन्होंने मेरे लिए कुछ नए कपड़े भी ले लिए और वो कपड़े मुझे दे दिया और कहने लगे कि कल जब सुबह तुम तैयार हुओं तो तुम यह कपड़े पहन लेना। अगले दिन सुबह मैं तैयार हो गया और मैंने जब वह कपड़े पहने तो मुझे बहुत ही खुशी हो रही थी क्योंकि मैंने आज तक कभी भी अपने को इतना अच्छा नहीं देखा था और मैं बहुत ही खुश हो रहा था, जब मैंने अपने आप को शीशे में देखा तो मैं अपने आप को पहचान भी ना सका और मैंने अच्छे से उस दिन अपनी दाढ़ी बनाई उसके बाद वह मुझे अपने साथ ले गए।

जब मैं उनके साथ गया तो वह मुझे अपने ऑफिस में ले गए। उनकी एक बहुत ही बड़ी एजेंसी थी जो कि सिक्योरिटी का काम संभालती थी। उन्होंने मुझे कहा कि अब से तुम ही मेरे साथ रहोगे और उसके बदले मैं तुम्हें महीने के अच्छे खासे पैसे दे दूंगा। अब मैं उनके साथ ही रहने लगा और जब भी उनके पास कोई बड़ा काम आता तो वह मुझे वहां पर भेज दिया करते थे क्योंकि मेरी कद काठी भी बहुत अच्छी थी और मेरा शरीर बहुत ही ज्यादा मजबूत था लेकिन वह चाहते थे कि मैं अपने आप को और भी ज्यादा अच्छे से बनाऊं। अब उन्होंने मुझे कहा कि तुम जिम जॉइन कर लो और वहां पर तुम अच्छे से कसरत करो। जब मैं जिम में गया तो मुझे पता भी नहीं था कि वहां पर क्या करना होता है लेकिन वहां के ट्रेनर ने मुझे सब कुछ सिखा दिया और अब मैं जिम भी करने लगा। धीरे-धीरे मेरा शरीर और भी खुलने लगा और मेरा शरीर बहुत ही मजबूत हो गया। वह जहां भी मुझे भेजते उसके बदले मुझे बहुत ही अच्छे पैसे मिलते थे। मुझे भी अब अच्छे पैसे मिलने लगे थे और मैं कुछ पैसे घर भेज दिया करता था जिससे कि मेरे पिता भी बहुत खुश है और वो कहने लगे कि लगता है तुम शहर में एक अच्छी नौकरी लग चुके हो। मैंने उन्हें बताया कि मैं यहां पर एक बाउंसर का काम कर रहा हूं और मुझे उसके बदले बहुत ही अच्छे पैसे मिल जाते हैं। जो मेरे बॉस हैं वह बहुत ही अच्छे हैं और मैं उनके साथ ही उनके घर पर रहता हूं। मेरे पिता बहुत ही खुश थे और वह मुझसे कहने लगे कि मुझे बहुत ही खुशी है कि तुमने बहुत अच्छे से तरक्की कर ली है।

मैं एक बार एक बड़ी पार्टी में गया हुआ था, वहां मुझे एक महिला दिखाई दी जो कि मुझे बार-बार देख रही थी। वह मुझे बहुत देर से घूरे जा रही थी लेकिन मैं वहां पर काम पर गया हुआ था इसलिए मैं उन्हें सिर्फ देख ही सकता था और मैं उन्हें कुछ नहीं बोल रहा था। वह मेरे पास आई और मुझसे वह पूछने लगी तुम्हारा नाम क्या है, मैंने उन्हें अपना नाम बता दिया। मैंने भी हिम्मत करते हुए उनसे उनका नाम पूछ ही लिया, उन्होंने अपना नाम मुझे सौम्या बताया। वह पूरी पार्टी में मुझे घूर कर देखती रही और मैं भी उन्हें घूरता रहा। मुझे नहीं पता उन्हें मुझ में क्या अच्छा लगा लेकिन उन्होंने मेरी बॉडी की बहुत ही तारीफ की और कहने लगी कि तुम्हारा शरीर बहुत ही मजबूत है। उन्होंने मुझे पूछा कि तुम कहां पर काम करते हो, तो मैंने उन्हें बताया कि मैं एक एजेंसी में काम करता हूं और उसके लिए ही मैं यहां पर आया हुआ हूं। उन्होंने मुझसे मेरी एजेंसी का कार्ड भी ले लिया। मैंने उन्हें अपने एजेंसी का विजिटिंग कार्ड दे दिया और उन्हें कहा कि जब भी आपको किसी भी सिक्योरिटी की जरूरत हो तो आप हमारी एजेंसी में फोन कर सकते हैं। वह मुझे कहने लगी कि मेरे पास बहुत ही पार्टियां होती हैं मैं तुम्हें फोन कर दिया करूंगी और तुम ही सारी चीजों को बंदोबस्त कर देना, उसके बदले मैं तुम्हें अच्छा खासा पैसा दे दूंगी। मैंने उन्हें कहा ठीक है आप मुझे फोन कर देंगे तो मेरे साथ में जितने भी लड़के हैं मैं उन्हें अपने साथ ले आऊंगा। मुझे भी अब लगने लगा कि मुझे ही अपना सिक्योरिटी का काम शुरू कर देना चाहिए क्योंकि मेरे साथ के जितने भी लड़के थे उन्हें उसके बदले में अच्छे पैसे मिल जाया करते थे और कुछ पैसा मेरा भी बन था। एक बार सौम्या का मुझे फोन आया और वह कहने लगी कि मैंने एक पार्टी अरेंज करवाई है तुम अपने साथ तीन चार लड़कों को ले आना, मैं अपने साथ में तीन-चार बाउंसरो को ले आया। मैं जब उस पार्टी में गया तो वहा का माहौल ही कुछ अलग किस्म का था वहा पर सारी औरतें थी और उन्होंने बड़े छोटे छोटे कपड़े पहने हुए थे।

सौम्या मेरे पास आई और वह मुझे कमरे में ले गई उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे अपने मुंह के अंदर मेरे लंड को ले लिया। वह मेरे लंड को इतने अच्छे से चूसने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था काफी देर तक उसने मेरे लंड को ऐसे ही अपने मुंह में लेने जारी रखा जिससे कि मेरे अंदर की उत्तेजना भी बढ़ने लगी। मैंने भी उसके कपड़े उतार दिए और उसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया। मैंने उसके स्तनों का रसपान बहुत देर तक किया उसके बाद मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया। उसकी चूत से बहुत ही तेज पानी का रिसाव हो रहा था। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि में डाला तो वह चिल्ला उठी और मैं उसे बड़ी तीव्र गति से चोदे जा रहा था। मैंने उसके दोनों पैरों को इतना चौड़ा कर लिया कि मेरा लंड आराम से उसकी योनि के अंदर तक चला जाता वह बहुत ही खुश हो जाती। मैंने काफी देर तक उसे ऐसे ही धक्के मारे लेकिन मेरा मन नहीं भर रहा था और मैंने अब उसे घोड़ी बनाते हुए उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया। मैंने उसकी गांड को बहुत देर तक चाटा जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी गांड के छेद में डाला तो उसकी आवाज निकल पडी। मैंने भी उसे कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेजी से मैं उसे झटके देने लगा उसकी गांड से बहुत तेज खून निकल रहा था और मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने पर लगा हुआ था। मैंने उसे इतनी तेजी से धक्के मारे कि उसका शरीर पूरा गर्म हो गया और वह मुझे कहने लगी कि तुमने तो मेरी गांड ही फाड़ कर रख दी है। मुझे बड़ा मजा आ रहा था जब मैं उसे धक्के मारता जाता लेकिन मैं उसकी गांड की गर्मी को ज्यादा समय तक बर्दाश्त नहीं कर पाया मेरा वीर्य उसकी गांड में ही गिर गया। वह इतनी खुशी हुई कि उसने उसके बाद मुझे अपने घर पर बुलाना शुरू कर दिया। मैं उसके घर पर जाकर ही उसे खुश कर दिया करता था उसके बदले वह मुझे मोटी रकम देने लगी।