मैडम ना हुयी मेरी माँ बन गयी

desi chudai ki kahani

जय जिनेन्द्र मैं हूँ चूतियों का सरदार और मुझे पसंद है चूत और सलवार | वैसे मुझे दूध और चुदाई और औरत की पूरी सेक्सी अदा पसंद है पर वो औरत सुन्दर होनी चाहिए | इसलिए मैंने सोचा आज मैं आपके लिए ऐसी ही एक सुन्दर कहानी लेकर औं जहाँ आपको चुदाई के बारे में जानने को मिले और आप इससे बड़े खुश भी हो जाओगे और मुझे इस बात की बड़ी ख़ुशी होगी | पर मैंने सोचा कि आपको एक नकली कहानी बताऊँ क्यूंकि इसमें मेरी अलसी माँ चुदी है मुझसे |

मेरी चुदाई की कहानी में आपका स्वागत है | मैं आपका दोस्त मोतीलाल अहिरवार आपके लिए अपनी चुदाई की कहानी लेकर आपके सामने उपस्थित हूँ | पहले मैं अपना परिचय दे दूँ मैं छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 35 साल है और मेरा मिजाज़ बहुत रंगीन है | मेरा नाम बहुत पुराना सा लगता है जैसा किसी बुढे व्यक्ति का नाम हो लेकिन क्या करूँ गाँव में ऐसे ही नाम रखते है | लेकिन अभी मैं गाँव में नहीं रहता अब मेरा ठिकाना रायपुर में है | मुझे चुदाई का बहुत चस्का है और इसी के चलते मुझे बहुत कुछ झेलना भी पड़ा है लेकिन कई बार बहुत मज़े भी मिले है | ऐसे ही कुछ मिले जुले किस्सों की कहानी है मेरी, तो आईये कहानी को विस्तार से जानते है |

दोस्तों मैं रायपुर में एक स्कूल में हिंदी पढ़ता हूँ और स्कूल की मैडमों पर चांस मारता रहता हूँ | एक बार की बात जब मैं एक दूसरे स्कूल में पढ़ाता था वहां की एक मैडम जिसका नाम संगीता था, वो मुझसे पटी थी | उस वक़्त उसकी उम्र लगभग 31 साल होगी और वो भी शादीशुदा थी और उसकी एक बेटी भी थी लेकिन फिर हम दोनों लगे रहते थे | एक बार की बात है हमारी एक्साम ड्यूटी लगी थी और उस दिन एक्साम के बाद हम दोनों स्टाफ रूम में बैठे थे, बाकी सब टीचर जा चुके थे | तभी मैंने कहा अच्छा मैडम कोई नहीं है और शायद कोई आएगा भी नहीं | तो उसने कहा तो ? तो मैंने कहा हो जाए और अपनी पैंट की ज़िप खोल दी | तो वो घुटनों पर बैठ गई और मेरी पैंट खोलके मेरा लंड बाहर निकालकर चूसने लगी | मैं कुर्सी पर बैठा और आँखें बंद करके लंड चुसवाने का मज़ा ले रहा था | थोड़ी देर तक उसने मेरा लंड चूसा और फिर मैंने उसको रोका और कहा अब मेरी बारी | मैंने उसकी साड़ी उठा के उसकी पैंटी उतारी और उसको टेबल पर बैठा दिया और उसकी चूत पर लंड रगड़ने लगा | वो आह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह्ह्ह उह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह कर रही थी | फिर मैंने उसकी चूत में लंड डाला और उसको चोदने लगा | मैंने उसको थोड़ी देर तक चोदा और फिर उससे कहा अब गांड की बारी, तो वो मुझे मना करने लग गई नहीं नहीं वहां नहीं बहुत दर्द होगा, लेकिन मैं नहीं माना | मैंने उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया और एक झटका मार के गांड में लंड घुसा दिया |

जैसे ही मैंने उसकी गांड में लंड घुसाया उसकी बहुत जोर से आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकली लेकिन मैं तो चुदाई के नशे में चूर था | जब मैं उसकी गांड मार रहा था वो मुझे धक्का दे रही थी और कह रही थी नहीं नहीं | मैं उसको गांड मारे जा रहा था तभी एक दम से मेरी नज़र दरवाज़े पर पड़ी, मैंने देखा की प्रिंसिपल सर खड़े थे | हम दोनों ने एक दूसरे को ठीक किया और प्रिंसिपल ने मुझे बहुत फटकार लगाई और मुझे कहा तुम स्कूल से निकल जाओ | फिर उसके कुछ दिन बाद मैंने स्कूल छोड़ दिया और दूसरी जगह आ गया जहाँ मैं अभी हूँ | मेरी हरकतें यहाँ भी नहीं रुकी और ऊपर से यहाँ तो एक 12वीं लड़की ने मुझसे आके कहा था सर आपको जो भी चाहिए ले लो मैं देने को तैयार हूँ बस आप मुझे फिजिक्स में पास करवा दो | वो मेरी और फिजिक्स वाले सर की अच्छी दोस्ती है और फिजिक्स वाले सर उससे गुस्सा थे | दरसल वो लड़की दो साल पीछे चल रही थी और उसको किसी भी कीमत पर पास होना था | तो मैंने भी मौका हाँथ से नहीं जाने दिया मैंने उससे अपना लंड चुसवाया और उसके दूध पर मुट्ठ गिराया और उसकी चूत भी चाटी लेकिन उसको चोदा नहीं, बच्ची है ना अच्छा नहीं लगता | फिर मैंने फिजिक्स से वाले से बात करके उसको अच्छे नंबर दिलवा दिए थे और जब उसको मैंने उसको बुला के उसके नंबर दिखाए तो उसने फिर से मेरा चूसा और मज़े दिए |

वो जब मेरा चूसती तो मुझे आस्मां नज़र आने लगता क्यूंकि उसके मुंह की गर्मी बड़ी अच्छी थी | मैंने कई लोगों को अपना लंड मुंह में दिया है पर इसकी बात अलग थी क्यूंकि हमारा खून तो एक ही था | मैं वैसे तो 20 मिनट में झड़ता था पर जब इसने मेरा लंड चूसा तो मैं इसके सामने 10 मिनट बस टिक पाया | वाह मज़ा ही आ गया था मुझे तो क्यूंकि जन्नत हमेशा से मेरे सामने थी पर मैं ही उसे कभी देख नहीं पाया था खैर अब तो देख लिया था मैंने |

अगले साल केमिस्ट्री की एक नई मैडम आई थी जिसका नाम अर्चना था | लगभग 30 साल की उम्र शादीशुदा एक लड़का पति बाहर रहने वाला और दिखने में तो ज़हर | प्यारा सा गोल चेहरा पिंक पिंक से गाल लम्बे सिल्की बाल और गांड कमाल | जब वो चलती थी तो उसकी गांड ऊपर नीचे हिलती थी और ये देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था | फिजिक्स वाले सर जिसका नाम समीर था उसने इस मैडम को पटाने में मेरी बहुत मदद की | वो मुझे केमिस्ट्री की कुछ कुछ चीज़ें पढ़ा देता था और मैं जाके अर्चना के सामने ज्ञान चोद देता था और वो मुझसे इम्प्रेस हो गई | लेकिन भोसड़ी वाली के नखरे बहुत थे ये करो वो करो यहाँ जाना है वहां जाना है लेकिन आखिरकार मैंने उसको पटा ही लिया और उसने शादीशुदा होते हुए भी हाँ कर दी | हमारी यहाँ भी एक्साम ड्यूटी लगती थी लेकिन अब मैं स्कूल में चुदाई करने के बारे में सोचता भी नहीं था | मेरी तो वो पल सोचके ही गांड फटती थी जब प्रिंसिपल ने मुझे पकड़ा था और मुझे स्कूल से भगा दिया था | तो अब स्कूल में खेलने की बात ख़त्म और कहीं से रूम की जुगाड़ भी नहीं थी क्यूंकि मेरे घर में मेरी पत्नी और बच्चे और उसके घर में उसका पति और बच्चा | लेकिन उसका पति कुछ दिन बाद बाहर जाने वाला था और उसका बच्चा तो 2 बजे स्कूल से आता था मतलब अगर हम एक दिन की छुट्टी मारें तो सुबह से लेकर दो बजे तक हमारे पास बहुत वक़्त था चुदाई के लिए | तो हम दोनों ने एक दिन का फैसला किया और उस दिन छुट्टी मार दी | मैंने सुबह उसको फ़ोन लगाया और पूछा बॉबी चला गया स्कूल, बॉबी उसके बेटे का नाम है | उसने कहा हाँ निकल गया आ जाओ और मैंने बिलकुल हवा की रफ़्तार से उसके घर पहुँच गया |

उसने अपने घर का दरवाज़ा खोला और मैंने देखा की उसने मैक्सी पहन रखी थी तो मैंने कहा ये सही है ज्यादा कुछ उतारना नहीं पड़ेगा बस मैक्सी और ब्रा पैंटी | तो उसने दरवाज़ा लगाया और कहा उतना भी नहीं करना पड़ेगा और अपनी मैक्सी उतारी दी | उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था तो उसके मैक्सी उतारते ही वो बिलकुल नंगी हो गई | जितनी गोरी वो बाहर से लगती थी अन्दर से और भी ज्यादा गोरी थी | उसके दूध पर तो उसकी नीली नीली नसे भी दिख रही थी वो भी दबाने पर | एक बच्चा होने के बाद भी उसका फिगर अच्छा था मतलब किसी भी 20-22 साल की लड़की को टक्कर दे दे | मैंने थोडा बहुत उसके दूध दबाये और चूत घिसी और फिर अपने कपड़े उतारने लगा | जैसे ही मैंने अपनी चड्डी उतारी तो उसने मेरे खड़े लंड को देखकर कहा ये तो मेरे पति से बहुत बड़ा है आज तो तुम मेरी जान ही निकाल दोगे | मैंने कहा बस देखती जाओ आगे आगे होता है क्या ? फिर मैं उसके पास गया और उसके बाजू में जाके सोफे पर बैठ गया और वो मेरा लंड चूसने लगी | उसने थोड़ी देर तक मेरा लंड चूसा और फिर मैंने कहा अब मेरी बारी | वो वहीँ पीछे होक सोफे पर लेट गई और मैंने उसकी एक टांग उठाई और उसकी चूत पर लंड रखके धीरे से लंड अन्दर डाल दिया | पहले मेरा लंड थोडा सा ही अन्दर गया था तो मैंने थोडा और जोर दिया और अपना पूरा लंड अन्दर डाल दिया और वो फडफाडने लगी और कहने लगी हाँ हाँ ऐसे ही और करो | ये सुनकर मेरा आत्मविश्वास बढ़ गया और मैंने और ज़ोर ज़ोर के झटके मारकर उसको चोदना शुरू कर दिया |

मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर तक घुस रहा था और मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि मैं इतनी अच्छी चुदाई कर्पाऊंगा | पर उसकी चूत और मेरा लंड शायद एक ही होने के लिए बने थे | इसलिए मैंने उसकी चूत को अन्दर तक मारा और उसकी बच्चेदानी से टकराने लगा मेरा लंड | वो कहने लगी वाह आज मुझे असली मर्द चोद रहा है और चोदो मुझे बस अब मैं तुमाहरे लंड कीई दीवानी हो गयी हूँ | मैंने इतना सुनते ही उसको दो तीन जोर जोर के झटके मारे और वो लस्त पड़ने लगी |

थोड़ी देर में मेरा मुट्ठ निकल पड़ा और मैंने उसकी चूत के ऊपर ही गिरा दिया और वो उठकर अन्दर बाथरूम में चली गई | फिर थोड़ी देर बाद वो किचन में गई और खाना बनाने लगी लेकिन उसने अभी भी कुछ नहीं पहना था सिर्फ आगे एप्रन पहना था | मैं उसके पास गया और पीछे से जाके उसको पकड़ लिया, तो उसने कहा खाना तो बना लेने दो | तो मैंने कहा मैंने कब रोका है तुम खाना बनाओ और मुझे मेरा काम करने दो | फिर मैंने उसको थोडा आगे झुकाया और उसने भी थोड़ी देर के लिए खाना बनाना बंद कर दिया | फिर मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड घुसाया और उसको चोदने लगा और वो अह्ह्ह्हहह्ह्ह्हा ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअ हह्ह्हह्ह्ह्ह आआआआअ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह उह्ह्ह्हह्ह करती रही | फिर मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और उसको चोदता रहा | थोड़ी देर बाद मेरा मुट्ठ निकल गया और इस बार मैंने मुट्ठ उसकी गांड के ऊपर गिरा दिया | उसके बाद कई बार मैं उसके घर गया और उसको चोदा, जब भी उसका पति घर से बाहर जाता था मैं उसकी कमी पूरी करने पहुँच जाता था | एक बार तो हमने स्कूल में भी चुदाई की थी लेकिन पकडे नहीं गए |