अनजान लड़की को उसके घर में जाकर चोदा

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मेरा नाम कुशल है, मैं  कोलकाता का रहने वाला हूं। मैंने अपना नया काम शुरू किया है, पहले मैं नौकरी करता था लेकिन मैंने नौकरी छोड़ दी है,  मैंने एलइडी बल्ब बनाने की फैक्ट्री डाली है। मैं अपनी नौकरी से बहुत ज्यादा परेशान हो गया था इसलिए मुझे लगा मुझे कुछ नया करना चाहिए इसी वजह से मैंने अपनी एक कंपनी खोल दी। मैंने कुछ पैसे अपनी शेविंग से निकाले और कुछ पैसे मैंने अपने पिताजी से लिए। मेरे पिताजी एक सरकारी कर्मचारी हैं इसलिए उन्हें लोन मिल गया और उन्होंने मुझे वह पैसे दे दिए। मेरी मम्मी घर में ही घर का काम संभालती हैं और मेरी बहन सरिता भी जॉब पर जाती है। वह एक अच्छी कंपनी में नौकरी करती है, हालांकि वह मुझसे छोटी है परंतु वह मुझ पर अपना बहुत ही हक जमाती है इसलिए मैं उसके आगे कुछ भी नहीं बोलता और मैं अपने काम में ही ध्यान देता हूं।

मुझे अपने काम के सिलसिले में खुद ही बाहर जाना पड़ता है क्योंकि मैंने मार्केटिंग के लिए कोई भी लड़का नहीं रखा है इसलिए मैं खुद ही अपना काम करता हूं। मैंने इस वजह से कोई लड़का नहीं रखा क्योंकि अभी मेरी कंपनी का शुरुआती समय है  जिसमें मैं अच्छा नहीं कर पाया तो मुझे घाटा हो सकता है इसलिए मैंने इसमें बिल्कुल भी रिस्क नहीं उठाया और खुद ही सब जगह जाकर मैं मार्केटिंग करता हूं। इस वजह से मुझे ठीक-ठाक ऑर्डर मिल जाते हैं जिससे मैं अपने पिताजी से लिए हुए पैसे की क़िस्त समय पर भर सकता हूं और उन्हें भी किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती। मुझे भी बहुत खुशी होती है जब मैं समय पर किस्त भर दिया करता हूं। मेरी बहन और मेरे बीच में बहुत ही अच्छे संबंध है, वह मुझसे हमेशा ही अपने ऑफिस के बारे में बातें शेयर करती है। मुझे ज्यादा समय नहीं मिल पाता परंतु जितना भी समय मुझे मिलता है मैं उसके साथ बैठा रहता हूं और हम दोनों आपस में बातें करते हैं। मुझे अपने काम के सिलसिले में अक्सर बाहर जाना पड़ता है। मैं एक बार अपने काम से वापस लौट रहा था तो मेरे सामने वाली सीट में एक लड़की बैठी हुई थी और उसके साथ में एक बुजुर्ग महिला भी थी, वह शायद उसकी दादी रही होंगी। मैं बस में ही बैठा हुआ था और अपने काम के बारे में सोच रहा था कि मुझे अपने काम को किस प्रकार से बढ़ाना है या अपने काम को कैसे मुझे आगे लेकर जाना है।

जब मैं यह बात सोच रहा था तो मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए जिससे मेरा काम और बडे। उसी दौरान उन बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई और मेरे हाथ में पानी की बोतल थी मैंने उन्हें वह पानी पिलाया तो उन्हें थोड़ा आराम मिला और उसके बाद मैंने एंबुलेंस को फोन कर दिया और उन बुजुर्ग महिला को हम लोग अस्पताल ले गए। वह लड़की बहुत ही घबराई हुई थी, मैंने उसे कहा कि आप चिंता मत कीजिए। मैंने उनसे पूछा कि यह आप की कौन लगती हैं तो वह कहने लगी कि वह मेरी दादी हैं, मुझे लग रहा था कि उनकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होने वाली है लेकिन यह मेरे मामा के पास गई हुई थी इसलिए मैं इन्हें अपने मामा के घर से वापस लेकर आ रही थी। मैंने उस लड़की का नाम पूछा तो उसने अपना नाम मुझे बताया, उसका नाम अंकिता है। वह मुझे कहने लगी कि आपने हमारी बहुत ही मदद की है नहीं तो मैं बहुत घबरा गई थी और मुझे तो पता भी नहीं था कि ऐसे समय में मुझे क्या करना चाहिए। मैंने अंकिता से कहा कि ऐसी कोई भी बात नहीं है यदि मैं आपकी मदद नहीं करता तो शायद कोई और आपकी मदद करता, उस वक्त मैं आपके पास वाली सीट में ही बैठा हुआ था इसलिए मैंने आपकी मदद की। डॉक्टर से जब हमने अंकिता की दादी के बारे में पूछा तो वह कहने लगे कि अब उनकी तबीयत थोड़ा ठीक है आप कुछ समय बाद इन्हें घर ले जा सकते हैं, शायद उनका बीपी लो हो गया था इसी वजह से उनकी तबीयत खराब हो गई। कुछ समय बाद मैंने उनके लिए एक और गाड़ी बुक करवा दी और वह लोग अपने घर जाने की तैयारी कर रहे थे। मैंने उसकी दादी को उठाते हुए कार में बैठा दिया और उसके बाद वह लोग वहां से चले गए। मैं भी अपने घर वापस लौट आया।

मैं घर में बैठकर अपना काम करने लगा क्योंकि मुझे कुछ ऑर्डर भिजवाने थे इसलिए मैं उसके लिए लिस्ट बना रहा था। मैं अपने घर में ही व्यस्त रहा, मुझे समय भी नहीं मिल पा रहा था। अब मुझे कुछ ऑर्डर मिलने लगे थे, मेरा काम भी और अच्छा होने लगा था लेकिन एक दिन मेरी बहन मुझे कहने लगी कि यदि तुम फ्री हो तो तुम मेरे साथ शॉपिंग करने के लिए चल सकते हो, मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारे लिए कुछ समय निकाल लेता हूं क्योंकि मैं अभी काम कर रहा हूं कुछ देर बाद मैं फ्री हो जाऊंगा तब हम लोग चल पड़ते हैं। जब मैं फ्री हो गया तो मैंने अपनी बहन से कहा कि चलो अब हम लोग चलते हैं, हम दोनों अब शॉपिंग करने के लिए बाजार चले गए। जब वह अपने लिए कपड़े ले रही थी तो मैं बहुत ही बोर हो रहा था क्योंकि वह एक कपड़े को कई बार देख रही थी लेकिन उसे कुछ भी पसंद नहीं आ रहा था, मैंने उसे कहा कि तुम्हें जो भी लेना है जल्दी लो क्योंकि मुझे फिर अपना काम भी करना है लेकिन उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था और वह बहुत देर से एक ही चीज को देख रही थी। हम दोनों अब उस दुकान से बाहर के लिए आ रहे थे तो अंकिता ने हमें आवाज दी, मैंने जब अंकिता को देखा तो मैं वह मुझे मिल गई। वह मेरे पास आई तो उसने मुझ से हाथ मिला लिया। मेरी बहन पूछने लगी कि तुम दोनों एक दूसरे को कैसे जानते हो, मैंने उसे सारी घटना बताई कि कुछ दिनों पहले हम लोग बस से आ रहे थे तो उसी वक्त अंकिता की दादी की तबीयत खराब हो गई, उसके बाद हम लोग उन्हें अस्पताल ले गए। अंकिता ने सरिता से पूछा कि यह तुम्हारे क्या लगते हैं, वह कहने लगी के यह मेरे बड़े भैया हैं।

मुझे नहीं पता था कि सरिता और अंकिता एक ही ऑफिस में काम करते हैं, जब उसने मुझे बताया कि हम दोनों एक ही ऑफिस में हैं तो मैंने कहा यह तो बहुत ही अच्छी बात है, चलो अब हमारी जान पहचान भी हो चुकी है क्योंकि वह दोनों एक साथ ऑफिस में थे और उन दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती भी थी। अंकिता कहने लगी कि उस दिन आपने हमारी बहुत मदद की लेकिन उस दिन मैं आपका शुक्रिया भी नहीं क्या पाई, मैं उस दिन बहुत ज्यादा घबरा गई थी और मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए इसी वजह से मैं आपका शुक्रियादा भी नहीं कर पाई। अंकिता ने उस दिन मेरा नंबर ले लिया और उसके बाद वह चली गई,  हम लोग भी अपने घर वापस लौट आए। मैंने अपनी बहन से कहा कि तुमने मेरा कितना समय बर्बाद कर दिया, तुम्हें कोई भी कपड़ा पसंद नहीं आ रहा था और तुम मेरा ही समय बर्बाद कर रही थी। एक दिन अंकिता ने मुझे फोन कर दिया और मैं उससे मिलने की लिए चला गया, जब मैं उसे मिला तो वह मुझे कहने लगी कि उस दिन भी मैं जल्दी में थी इसलिए आप के साथ ज्यादा बात नहीं कर पाई। अब हम दोनों एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे और बात कर रहे थे, मुझे भी अंकिता से बात करना बहुत अच्छा लग रहा था और वह भी मुझसे बात कर के बहुत खुश थी। मैं सोचने लगा कि यदि मैंने उस दिन अंकिता की मदद नहीं की होती तो शायद हमारी इतनी बात नहीं हो पाती। मैंने अंकिता को फोन कर दिया और जब अंकिता से बात कर रहा था तो मैंने उसकी दादी की तबीयत पूछी तो वह कहने लगी कि अब तो वह बहुत अच्छी है और पहले से अच्छा महसूस कर रही है। उस दिन हम दोनो के बीच बहुत ज्यादा बात हो गई मैं उसे कहने लगा मुझे अपनी नंगी तस्वीर भेज दो उसने मुझे अपनी नंगी तस्वीर भेज दी। जब मैंने उसके स्तन और उसकी गांड को देखा तो मुझसे बिल्कुल नहीं रहा गया और मेरा मूड खराब खराब हो गया। मैं रात को ही अंकिता को घर चला गया जब मैं रात को उसके घर पहुंचा तो उसने भी अपने दरवाजे को चुपके से खोला और मुझे अंदर बुला लिया।

मैं जब उसके कमरे में गया तो उसने अपने कपड़े उतार दिए उसका बदन मेरे सामने नंगा था मैंने भी अपने लंड को अंकिता के मुंह में डाल दिया। वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी और उसे बड़ा मजा आता जब वह मेरे लंड को अपने मुंह में लेती मैंने भी उसके गले तक अपने लंड को डाल दिया। उसका बाद मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए उसकी योनि पर जैसे ही अपनी जीभ को टच किया तो उससे बहुत ज्यादा पानी निकलने लगा और उसका पानी बाहर की तरफ आने लगा। उसे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था। मैंने अपने लंड को उसकी गर्म और मुलायम चूत पर रखा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ। उसकी चूत बहुत ज्यादा गरम हो रखी थी मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को डाला तो उसकी सील टूट गई वह बहुत चिल्लाने लगी। मैंने भी उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया और बड़ी तेजी से उसे धक्के देने लगा मैंने उसे इतनी तेजी से चोदा की उसका पूरा शरीर हिलने लगा और मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में ले लेता। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं अंकिता को इस प्रकार से चोद रहा था और उसके मुंह से भी बड़ी तेज सिसकिया निकल रही थी लेकिन उसकी योनि बहुत ज्यादा टाइट थी इसलिए मैं उसकी चूत की गर्मी को ज्यादा देर तक नहीं झेल पाया और मेरा मेरे माल गिर गया। जब मेरा माल गिरा तो मैं उसके साथ ही सो गया और सुबह में जल्दी उठ कर अपने घर चला गया उसके बाद से मेरे और अंकिता के बीच सेक्स को लेकर बहुत बात होती है हम दोनों के बीच बहुत सेक्स होता है।